दो-दो हाथ के बाद Dragon से India-China के बीच सीमा मुद्दों पर हुआ संवाद, परिणाम में सामने आई बड़ी बात
-
By
Admin
Published - 07 August 2026 18 views
आपको हम बता दें कि नई दिल्ली में आयोजित बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) सुजीत घोष ने किया, जबकि चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चीन के विदेश मंत्रालय के सीमा एवं समुद्री मामलों की महानिदेशक होउ यानची ने किया।
भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रही सीमा विवाद के बावजूद रिश्तों में धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगे हैं। नई दिल्ली में आयोजित भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय तंत्र (WMCC) की 36वीं बैठक ने साफ संकेत दिया है कि दोनों देश बातचीत के जरिए सीमा पर शांति बनाए रखने और लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। हालांकि भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि द्विपक्षीय संबंधों में वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पूरी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे। यही वजह है कि सीमा प्रबंधन, सैन्य समन्वय, सीमा निर्धारण, ट्रांस-बॉर्डर नदियों और पारंपरिक व्यापार जैसे सभी अहम मुद्दों पर भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ मजबूती से रखा।
बताते दें कि नई दिल्ली में आयोजित बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) सुजीत घोष ने किया, जबकि चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चीन के विदेश मंत्रालय के सीमा एवं समुद्री मामलों की महानिदेशक होउ यानची ने किया। दोनों देशों ने एलएसी की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करते हुए इस बात पर सहमति जताई कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता ही द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है। दोनों पक्षों ने यह भी तय किया कि किसी भी गलतफहमी या सैन्य गलत आकलन से बचने के लिए राजनयिक और सैन्य स्तर पर स्थापित सभी संवाद तंत्रों का निरंतर उपयोग किया जाएगा। स्थानीय कमांडर स्तर की बैठकों और WMCC जैसे मंचों को आगे भी सक्रिय बनाए रखने पर सहमति बनी।
हम आपको बता दें कि यह बैठक ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच सीमा पर व्यावहारिक सहयोग भी धीरे-धीरे बहाल हो रहा है। लगभग छह वर्षों के अंतराल के बाद उत्तराखंड के लिपुलेख और हिमाचल प्रदेश के शिपकी ला दर्रे से पारंपरिक सीमा व्यापार दोबारा शुरू होना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कोविड महामारी और सीमा तनाव के कारण 2020 से बंद पड़े इन व्यापार मार्गों के खुलने से सीमावर्ती क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और स्थानीय समुदायों का विश्वास भी मजबूत होगा। चीन ने शुरुआती चरण में सीमित संख्या में व्यापारियों को अनुमति दी है, लेकिन यह पहल दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की प्रक्रिया का प्रतीक मानी जा रही है। इससे पहले दोनों देश नाथू ला सहित तीन अधिकृत व्यापारिक मार्गों को चरणबद्ध तरीके से खोलने पर भी सहमति हो चुके हैं।
इसके साथ ही विदेश सचिव विक्रम मिसरी की हालिया चीन यात्रा ने भी इस कूटनीतिक प्रक्रिया को नई गति दी। बीजिंग में उन्होंने चीन के वरिष्ठ नेताओं के साथ व्यापक वार्ता कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग की उस साझा सोच को आगे बढ़ाने पर चर्चा की, जिसके अनुसार भारत और चीन प्रतिस्पर्धी होने के साथ-साथ विकास के अवसरों में साझेदार भी बन सकते हैं। दोनों देशों ने व्यापार, आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और जन-से-जन संपर्क बढ़ाने पर सहमति जताई, लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया कि सीमा पर स्थायी शांति के बिना किसी भी व्यापक साझेदारी की मजबूत नींव तैयार नहीं हो सकती।
सम्बंधित खबरें
-
जब किसी इलाके का दुनिया से संपर्क काट दिया जाता है तो समझ लीजिए वहां जुल्म की इंतहा हो रही है और ब्र
-
अचानक मोदी के लिए क्या तोहफा लेकर भारत आ रहे पुतिन? 12 से 13 सितंबर को दिल्ली में ब्रिक्स का बड
-
7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में स्पष्ट नियम ह
-
G7 समिट का अनदेखा किस्सा: PM Modi नहीं चाहते थे प्रेस वार्ता, पर ऐन मौके पर 'भूल' गए Donald Trump, 4
-
लक्सन ने यह भी कहा कि नवंबर में होने वाले चुनाव से पहले 1 अक्टूबर को संसद के भंग होने से पहले वोटिंग