मुस्लिम NATO में ईरान की एंट्री, खुलासे से इजरायल के उड़े होश, अब क्या करेंगे ट्रंप?
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Published - 24 August 2026 5 views
7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में स्पष्ट नियम है। अगर एक पर हमला हुआ तो सब पर हमला माना जाएगा। ईरानी संसद की मीडिया विंग के प्रमुख मेहंदी रहीमी ने दावा किया है कि तीनों देशों ने ईरान को भी इस ऐतिहासिक गुट में शामिल होने का प्रस्ताव भेजा है।
क्या खाड़ी के दो सबसे बड़े दुश्मन सऊदी अरब और ईरान अब एक ही सैन्य छाते के नीचे आने वाले हैं? क्या अमेरिका और इसराइल को घेरने के लिए मुस्लिम देशों का एक ऐसा अमेद्य किला तैयार हो रहा है जिसकी कमान पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी और ईरान के हाथों में होगी? ईरान की संसदीय समाचार एजेंसी खाना मिल्लत के प्रमुख मेहंदी रहीमी ने अलमयादीन को एक दिए इंटरव्यू में यह कहकर सनसनी फैला दी कि ईरान को मक्का रक्षा समझौते में शामिल होने का न्योता मिला है। तेहरान इस पर गंभीरता से विचार भी कर रहा है।
7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में स्पष्ट नियम है। अगर एक पर हमला हुआ तो सब पर हमला माना जाएगा। ईरानी संसद की मीडिया विंग के प्रमुख मेहंदी रहीमी ने दावा किया है कि तीनों देशों ने ईरान को भी इस ऐतिहासिक गुट में शामिल होने का प्रस्ताव भेजा है। रहीमी के मुताबिक क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए स्वदेशी ढांचा खड़ा होना ईरान की कूटनीतिक जीत है। हालांकि अभी तक ना तो ईरानी विदेश मंत्रालय और ना ही सऊदी, तुर्की या पाकिस्तान के आधिकारिक प्रवक्ताओं ने इस न्योते को औपचारिक पुष्टि की है। ऐसे में अगर यह दावा सच साबित हो गया तो तेहरान इस ब्लॉक में शामिल होता है तो मध्य पूर्व के तमाम पुराने समीकरण एक बार में ही ध्वस्त हो जाएंगे। दशकों तक एक दूसरे के प्रतिद्वंदी रहे सऊदी अरब और ईरान का एक रक्षा मंच पर आना अमेरिका और इसराइल के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं होगा।
तुर्की पहले ही साफ कर चुका है कि वह यह समझौता पूरी तरह रक्षात्मक और किसी देश के खिलाफ नहीं कर रहा है। ऐसे में अगर पाकिस्तान की परमाणु ताकत, तुर्की की आधुनिक सेना, सऊदी की वित्तीय शक्ति और ईरान की मिसाइल क्षमता एक साथ आती है तो इसराइल की रणनीतिक घेराबंदी पूरी तरह पस्त हो जाएगी। लेकिन सवाल यह भी है कि जो तीनों देश अमेरिका के मित्र देश हैं, चाहे वो पाकिस्तान, सऊदी या फिर तुर्की हो। वो क्या ईरान जैसे दुश्मन को अपने गुट में शामिल करेंगे? एक तरफ पाकिस्तान खुद को इस्लामिक नाटो का मुख्य रणनीतिकार पिलर बताकर शेखी बगारने में लगा है। दूसरी तरफ खाड़ी देशों में उसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है। हाल ही में मार्च से जुलाई के बीच छह खाड़ी देशों ने 20,000 से अधिक पाकिस्तानियों को वापस डिपोर्ट कर दिया है। पाकिस्तान नागरिकों पर भीख मांगने, ओवरस्टे करने और अपराधों में लिप्त होने के गंभीर आरोप लगे हैं। एक तरफ पाकिस्तान वैश्विक स्तर पर अपनी सैन्य साख चमकाने की कोशिश कर रहा है।
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