उत्तराखंड ट्रैकिंग हादसा या कुछ और? 5 दिन बाद भी नहीं मिला सुराग, साथ आए दो युवकों में से एक यूपी का शख्स
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Published - 03 June 2026 3 views
उत्तराखंड के दयारा बुग्याल में लापता महिला ट्रैकर की खोज अब एक रहस्यमयी झील पर आकर टिक गई है। पांच दिनों के मैराथन सर्च ऑपरेशन के बाद भी जब बबीता पांडेय का कोई सुराग नहीं मिला, तो जांच एजेंसियों ने कैंप साइट के पास स्थित इस झील की गहराई नापने का फैसला किया है। अब तक सेना, आईटीबीपी, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस समेत करीब 150 जवानों ने जंगलों और पहाड़ी ढलानों को छान मारा है। क्योंकि टीम को जमीनी रास्तों पर कोई कामयाबी नहीं मिली, इसलिए अब फोकस इस रहस्यमयी झील पर शिफ्ट हो गया है। जल्द ही एसडीआरएफ की 6 सदस्यीय डीप ड्राइव टीम अत्याधुनिक उपकरणों के साथ पानी के भीतर उतरकर सूक्ष्मता से जांच शुरू करेगी। इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ी पहेली यह है कि उस दिन ट्रैक पर असल में क्या हुआ था? पुलिस को इस घटना की जानकारी काफी विलंब से दी गई, जिससे शुरुआती कीमती घंटों में खोज कार्य प्रभावित हुआ। हालांकि, सूचना मिलते ही प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है, लेकिन दयारा बुग्याल की शांत वादियों में बबीता की सुपुर्दगी अब भी एक बड़ा रहस्य बनी हुई है। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, बबीता पांडेय अपने दो पुरुष मित्रों के साथ 25 मई को ऊधमसिंह नगर से उत्तराखंड घूमने निकली थी। पहली रात उन्होंने देहरादून में बिताई, जिसके बाद 26 मई को वे हर्षिल पहुंचे। वहां उन्होंने लंबा टॉप और गंगोत्री के दर्शन किए। 28 मई को यह ग्रुप रैथल गांव में ठहरा और 29 मई को उन्होंने दयारा बुग्याल की ट्रैकिंग शुरू की, जिसकी सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई है। इसके बाद तीनों गोई बेस कैंप पहुंचे, जहां से अचानक बबीता के गायब होने की खबर आई। इस रहस्यमयी गुमशुदगी के बाद पुलिस ने बबीता के दोनों साथियों को मनेरी में रोककर अपनी कस्टडी में लिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इनमें से एक युवक दिनेश सिंह ऊधमसिंह नगर (उत्तराखंड) का और दूसरा युवक हरमनप्रीत सिंह शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां दोनों से सघन पूछताछ कर मामले की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही हैं, हालांकि अभी तक किसी भी साजिश की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। समुद्र तल से लगभग 2600 से 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित दयारा बुग्याल अपने घने जंगलों, तीखी ढलानों और बेहद कठिन रास्तों के लिए जाना जाता है। इस दुर्गम इलाके के कारण रेस्क्यू टीमों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन का कहना है कि जब तक बबीता का पता नहीं चल जाता, यह रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी शिद्दत के साथ जारी रहेगा।
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