China, PoJK, West Asia, Bangladesh, Russia और US से संबंधित मुद्दों पर India ने दिया जवाब
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Published - 17 July 2026 11 views
भारतीय विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा, पश्चिम एशिया के तनाव और रणनीतिक परियोजनाओं से जुड़े कई अहम मुद्दों पर भारत का स्पष्ट और बेबाक पक्ष रखा। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) पर भारत के दावे को दोहराने से लेकर पहलगाम आतंकी हमले पर पाकिस्तान को कठघरे में खड़ा करने तक, विदेश मंत्रालय का संदेश साफ था कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा के सवाल पर किसी तरह का भ्रम नहीं छोड़ना चाहता। रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) को लेकर दोटूक शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है और देश अपने संप्रभु अधिकारों पर पूरी तरह अडिग है। पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते हालात पर भी विदेश मंत्रालय ने चिंता जताई। जायसवाल ने कहा कि भारत का हमेशा से स्पष्ट रुख रहा है कि किसी भी संघर्ष में नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारतीय समुद्री समुदाय के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। बड़ी संख्या में भारतीय नाविक इस क्षेत्र में कार्यरत हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। ईरान के चाबहार बंदरगाह को लेकर भी विदेश मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की। जायसवाल ने बताया कि अमेरिका द्वारा दी गई छूट (वेवर) पहले ही समाप्त हो चुकी है और इसके बाद भारत संबंधित पक्षों के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा कर रहा है। हाल में बंदरगाह पर हमले की खबरों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी रिपोर्टें सामने आई थीं, लेकिन जिस टर्मिनल का संचालन भारत करता है, उसे किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा। विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस का समग्र संदेश यही रहा कि भारत सुरक्षा, संप्रभुता और रणनीतिक हितों पर अपने रुख को लेकर पूरी तरह स्पष्ट है। चाहे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा हो, PoJK पर भारत का दावा, पश्चिम एशिया में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, चाबहार बंदरगाह का रणनीतिक महत्व या फिर मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना—सरकार ने हर मोर्चे पर यह संकेत दिया कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं और हर कदम उसी दृष्टि से उठाया जा रहा है।
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