महायुद्ध का ख़तरा मंडराया, दुनिया भर में मचा हड़कंप! Donald Trump ने छेड़ा एक और संघर्ष! इस बार निशान China पर साधा
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Published - 02 July 2026 26 views
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया बयान ने पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी है और वैश्विक राजनीति में भारी तनाव पैदा कर दिया है। पनामा नहर पर चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर ट्रंप ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए साफ चेतावनी दी है कि अमेरिका इस रणनीतिक जलमार्ग पर चीन का कब्ज़ा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा अमेरिका । वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा मानी जाने वाली पनामा नहर को लेकर दोनों महाशक्तियों के बीच पैदा हुआ यह टकराव अब एक नए अंतरराष्ट्रीय संकट का रूप ले चुका है। कूटनीतिक गलियारों और डिफेंस एक्सपर्ट्स के बीच इस बात का डर तेजी से गहरा रहा है कि लैटिन अमेरिका में प्रभाव जमाने की यह जंग कहीं दोनों परमाणु संपन्न देशों को एक भीषण महायुद्ध की तरफ न धकेल दे, जिसने इस समय पूरी दुनिया को बेहद तनाव और खौफ के माहौल में डाल दिया है।
अपने संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अतीत में अमेरिका द्वारा पनामा नहर का नियंत्रण पनामा को सौंपने के फैसले की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि नियंत्रण मिलने के तुरंत बाद पनामा ने जहाजों के लिए ट्रांज़िट फीस (पारगमन शुल्क) चार गुना बढ़ा दी। इसके बाद भी इसे दो बार और बढ़ाया गया, फिर भी नहर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में कोई कमी नहीं आई। ट्रंप ने कहा, "उन्होंने बस सालों-साल तक बहुत सारा पैसा कमाया। यह कितना बेवकूफी भरा फैसला था?"
गौरतलब है कि ट्रंप का इशारा 1977 की ऐतिहासिक 'टोरिजोस-कार्टर संधि' की ओर था, जिसके तहत अमेरिका ने धीरे-धीरे इस नहर का नियंत्रण पनामा को सौंपना शुरू किया था और साल 1999 में यह प्रक्रिया पूरी तरह संपन्न हुई थी। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अब चीन इस खाली जगह को भरने और इस रणनीतिक जलमार्ग पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहा है, जिसे अमेरिका किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।
अमेरिका के लिए क्यों इतनी महत्वपूर्ण है पनामा नहर?
पनामा नहर सिर्फ प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर को जोड़ने वाला एक रास्ता भर नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था और उसकी सैन्य ताकत की रीढ़ है। इसे निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र: अमेरिका के कुल कंटेनर ट्रैफिक का लगभग 40% हिस्सा इसी नहर से होकर गुजरता है। सालाना 270 बिलियन डॉलर से अधिक का अमेरिकी कार्गो इस रूट पर निर्भर है।
समय और पैसे की भारी बचत: यदि यह नहर न हो, तो जहाजों को पूरे दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप का चक्कर लगाकर (केप हॉर्न होकर) जाना पड़ेगा। पनामा नहर जहाजों की यात्रा का समय कई दिन कम कर देती है, जिससे ईंधन और लॉजिस्टिक्स की लागत में अरबों डॉलर की बचत होती है।
सैन्य और नौसैनिक बढ़त: अमेरिकी नौसेना के लिए अटलांटिक से पैसिफिक महासागर के बीच युद्धपोतों और रसद को तेजी से ट्रांसफर करने के लिए यह नहर हमेशा से रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील रही है।
लैटिन अमेरिका में चीन के बढ़ते निवेश और बुनियादी ढांचों (Infrastructures) पर बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अमेरिका इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़े खतरे के रूप में देख रहा है।
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