बेहतर सुविधाओं के साथ कारोबार बढ़ाने पर दिया जाये जोर-केशव
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Published - 31 October 2026 9 views
सरकारी दफ्तरों में आने-जाने वाले लोगों की रोजाना की आवाजाही अब ग्रामीण महिलाओं की कमाई का जरिया बन रही है। उत्तर प्रदेश में 2100 से अधिक प्रेरणा कैंटीन स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए रोजगार और कारोबार का नया मंच बन चुकी हैं। आज ये चार हजार से अधिक परिवारों का सहारा बन गई हैं। तहसील, विकास भवन, कलेक्ट्रेट और ब्लॉक कार्यालयों जैसे सरकारी परिसरों में संचालित इन कैंटीनों ने समूहों के लिए स्थानीय स्तर पर स्थायी बाजार तैयार किया है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से संचालित इस पहल के जरिये महिलाओं को अपने ही क्षेत्र में कारोबार का अवसर मिल रहा है। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल सरकारी योजनाओं का लाभार्थी बनाना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर उद्यमी बनाकर परिवार, समाज और प्रदेश एवं देश की आर्थिक प्रगति में भागीदार बनाना है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।प्रेरणा कैंटीनों के लिए सरकारी कार्यालयों की रोजाना की फुटफॉल कारोबार का आधार बन रही है। कर्मचारियों और आगंतुकों की आवाजाही से कैंटीनों को स्थानीय ग्राहक मिल रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को रोजगार के साथ कारोबार चलाने का अनुभव भी मिल रहा है। प्रेरणा कैंटीनों का विस्तार विकासखंड स्तर तक होने से गांव के स्वयं सहायता समूहों को स्थानीय स्तर पर कारोबार का अवसर मिल रहा है। सरकारी परिसरों को ग्रामीण आजीविका से जोड़ते हुए यहां समूहों के उत्पादों और सेवाओं के लिए नया बाजार तैयार हुआ है। प्रेरणा कैंटीनों का नेटवर्क सरकारी कार्यालयों के साथ स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच चुका है। विकास भवन, कलेक्ट्रेट और ब्लॉक कार्यालयों के अलावा पीएचसी और सीएचसी परिसरों में भी कैंटीन संचालित की जा रही हैं। इससे सरकारी कार्यालयों में आने वाले कर्मचारियों और आगंतुकों के साथ स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले रोगियों व तीमारदारों को भी भोजन और नाश्ते की सुविधा मिल रही है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि प्रेरणा कैंटीनों के माध्यम से कर्मचारियों और आगंतुकों को स्वच्छ, पौष्टिक और घर जैसा किफायती भोजन व नाश्ता उपलब्ध कराया जा रहा है।कैंटीन सरकारी परिसरों की जरूरत पूरी कर रही हैं तो दूसरी ओर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए रोजगार का माध्यम बन रही हैं।
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