काले नमक के चक्कर में न करें सेहत से खिलवाड़! आयोडीन की कमी से हो सकती है ये बीमारी
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Published - 23 October 2026 7 views
आजकल हेल्दी रहने के ट्रेंड के चलते कई लोग साधारण सफेद नमक की जगह काला नमक और पिंक सॉल्ट का इस्तेमाल करने लगे हैं। सोशल मीडिया पर भी इन नमकों को सेहत के लिए बेहतर बताने वाले कई दावे किए जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आप लंबे समय तक आयोडीन युक्त नमक की जगह ऐसा नमक इस्तेमाल करते हैं, जिसमें पर्याप्त आयोडीन नहीं है, तो शरीर में इस जरूरी मिनरल की कमी हो सकती है? आयोडीन की कमी से थायराइड हार्मोन का उत्पादन प्रभावित होता है और घेंघा जैसी समस्या का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास से लेकर गर्भ में पल रहे शिशु के मस्तिष्क के विकास तक के लिए आयोडीन बेहद जरूरी है। ऐसे में आइए जानते हैं कि शरीर में आयोडीन की कमी क्यों होती है और इससे बचने के लिए किस तरह के नमक का इस्तेमाल करना चाहिए।
काला नमक बढ़ा सकता है आयोडीन की कमी का खतरा
आयोडीन एक जरूरी मिनरल है, जिसकी मदद से थायराइड ग्रंथि शरीर के लिए जरूरी हार्मोन बनाती है। ये हार्मोन मेटाबॉलिज्म, शरीर की ग्रोथ और बच्चों के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। शरीर खुद आयोडीन नहीं बना सकता, इसलिए इसकी जरूरत पूरी करने के लिए भोजन का सहारा लेना पड़ता है। काले नमक और पिंक सॉल्ट में आयोडीन की मात्रा कम या अपर्याप्त हो सकती है, खासकर तब जब इन्हें आयोडीन से फोर्टिफाई न किया गया हो। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से आयोडीन युक्त नमक की जगह इनका इस्तेमाल करता है और भोजन से भी पर्याप्त आयोडीन नहीं लेता, तो उसमें आयोडीन की कमी का खतरा बढ़ सकता है। ।प्प्डै के डॉक्टर के मुताबिक, इन नमकों में आयोडीन की कम मात्रा चिंता का विषय है। आयोडीन की कमी से थायराइड ग्रंथि बढ़ सकती है, जिसे घेंघा कहा जाता है। बच्चों में इसकी गंभीर कमी शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकती है।
प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए क्यों जरूरी है आयोडीन?
गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की पर्याप्त मात्रा लेना बेहद जरूरी है। इस समय गर्भ में पल रहे शिशु के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास के लिए थायराइड हार्मोन अहम भूमिका निभाते हैं। आयोडीन की गंभीर कमी होने पर शिशु के मस्तिष्क के विकास पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को अपने खानपान में आयोडीन के पर्याप्त स्रोत शामिल करने चाहिए। हालांकि, जरूरत से ज्यादा आयोडीन लेना भी नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह के बिना आयोडीन सप्लीमेंट लेने से बचना चाहिए।
आयोडीन युक्त नमक खाना क्यों है जरूरी?
भारत में आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए वर्ष 1962 में राष्ट्रीय घेंघा नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया गया था। बाद में 1992 में इसे राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम का नाम दिया गया। इसका उद्देश्य आयोडीन युक्त नमक की उपलब्धता बढ़ाना, नमक की गुणवत्ता की निगरानी करना और लोगों को आयोडीन की अहमियत के बारे में जागरूक करना था। द लांसेट रीजनल हेल्थ-साउथईस्ट एशिया में 2026 में प्रकाशित बताई गई आईसीएमआर की स्टडी में 10 से 18 वर्ष की उम्र के 8,093 स्कूली बच्चों का आकलन किया गया था। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस अध्ययन में घेंघा की दर 10.3 प्रतिशत दर्ज की गई। यह आंकड़ा बच्चों में आयोडीन की कमी और उससे जुड़ी समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत को रेखांकित करता है। आयोडीन की कमी से बचने के लिए रोजाना सीमित मात्रा में आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करना एक आसान तरीका है। नमक खरीदते समय पैकेट पर आयोडीन युक्त होने की जानकारी जरूर देखें।
कैसे छूटी आयोडीन युक्त नमक इस्तेमाल करने की आदत?
आजकल सोशल मीडिया और हेल्थ ट्रेंड्स में काले नमक, सेंधा नमक और पिंक सॉल्ट को अक्सर साधारण सफेद नमक से बेहतर बताया जाता है। इनके बारे में पाचन में मदद करने, शरीर को डिटॉक्स करने और हाइड्रेशन बेहतर बनाने जैसे दावे भी किए जाते हैं। हालांकि, ऐसे सभी दावों के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। यह समझना जरूरी है कि प्राकृतिक या कम प्रोसेस्ड होने का मतलब यह नहीं है कि किसी नमक में आयोडीन भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद होगा। अगर कोई नमक आयोडीन युक्त नहीं है, तो उसे नियमित रूप से इस्तेमाल करने से शरीर की आयोडीन संबंधी जरूरत पूरी न होने का खतरा हो सकता है। काला नमक और साधारण नमक, दोनों में सोडियम हो सकता है। इसलिए काला नमक इस्तेमाल करने का मतलब यह नहीं है कि ब्लड प्रेशर पर इसका असर नहीं पड़ेगा। अधिक सोडियम का सेवन हाई ब्लड प्रेशर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है।
क्या है सही तरीका?
रोजाना सीमित मात्रा में आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करें।
काला नमक या पिंक सॉल्ट पसंद है, तो यह जांचें कि उसमें आयोडीन मिलाया गया है या नहीं।
नमक की कुल मात्रा कम रखें, क्योंकि ज्यादा सोडियम सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
बच्चों, गर्भवती महिलाओं और आयोडीन की कमी के जोखिम वाले लोगों के खानपान पर विशेष ध्यान दें।
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