पीएम मोदी के रिकॉर्ड पर कांग्रेस का बड़ा हमला, कहा, देश पर बन गए हैं बोझ, लोकतंत्र की हत्या के लिए जिम्मेदार
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Published - 10 June 2026 1 views
कांग्रेस ने सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सेवा देने के नरेन्द्र मोदी के रिकॉर्ड को लेकर बुधवार को दावा किया कि वह भारत पर एक बोझ की तरह हैं क्योंकि वह लोकतंत्र की हत्या के लिए जिम्मेदार हैं। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह आरोप भी लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी भले ही पंडित जवाहरलाल नेहरू के प्रति ष्सनकष् के चलते कोई खुद का तय मील का पत्थर हासिल कर रहे हों, लेकिन असल में वह पंडित नेहरू, बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर, सरदार वल्लभ भाई पटेल और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे महापुरुषों की उपलब्धियों को मिटाना चाहते हैं। रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया कि 15 अगस्त, 1947 को जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रधानमंत्री बने और उन्होंने एक ऐसी शानदार कैबिनेट की अगुवाई की, जैसी दुनिया में शायद ही कभी देखी गई हो। इसके अगले पांच वर्षों में आधुनिक भारत का निर्माण हुआ। उस समय 560 से अधिक रियासतों को शांतिपूर्ण ढंग से भारतीय संघ में मिलाया गया, भारत के संविधान पर चर्चा हुई और उसे अंगीकार किया गया, जमींदारी प्रथा खत्म की गई, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण लागू किया गया, कई बहुउद्देशीय सिंचाई व बिजली परियोजनाएँ शुरू की गईं, विज्ञान-तकनीक (जिसमें परमाणु ऊर्जा भी शामिल है) के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया गया। भारत वैश्विक मामलों में एक ताकत के रूप में उभरा। रमेश का कहना है कि उसी दौर में सभी वयस्कों को वोट देने का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए 17 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं वाली मतदाता सूची तैयार की गई और आजाद भारत के पहले आम चुनाव अक्टूबर 1951 से फरवरी 1952 के बीच हुए।ष्1947-52 के दौरान नेहरू के प्रधानमंत्री रहते हुए भारत की उपलब्धियों को अब प्रधानमंत्री मोदी मिटाना चाहते हैं, जिसमें सरदार पटेल, डॉ. आंबेडकर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सी. राजगोपालाचारी और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे दिग्गजों ने अहम भूमिका निभाई थी। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी को नेहरू को लेकर एक तरह का जुनून या सनक है। हो सकता है कि उन्होंने आज खुद से तय किया हुआ और संदिग्ध तरीके से बनाया गया कोई मील का पत्थर हासिल कर लिया हो, लेकिन वह भारत के ऊपर एक बोझ की तरह हैं, क्योंकि वह भारत में लोकतंत्र की हत्या के लिए जिम्मेदार हैं। लोकतंत्र के संस्थान... एक स्वतंत्र निर्वाचन आयोग और एक शुद्ध मतदाता सूची अब खतरे में हैं।
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